कंगना रनौत का करण पर हमला- इंडस्ट्री करण जौहर और उनके पापा ने नहीं बनाई

           

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भाई मेरा तो यह अपना सोचना है की जो हिंदुस्तान के छोटे कस्बों से लोग महाराष्ट्र जाते हैं वह दिन रात मेहनत करते हैं और स्टार बनने का ख्वाब देखते हैं और वह अपनी कड़ी मेहनत से स्टार बन जाते है और जो यह बड़े स्टार इन लोगों पर अपनी नजर रखते हैं और फिर इन लोगों को ड्रग्स की लत लगा कर दुनिया से अलविदा कर देते हैं चाहे उसमें रिया चक्रवर्ती हो या फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े नाम हो और जो यह महेश भट्ट है यह तो शुरू से ही फिल्म इंडस्ट्री में छोटे लोगों का आना पसंद नहीं करते हैं जय हिंद जय भारत


कंगना राणावत पर नई कविता

नींव हिला दी मातोश्री की , हिल गए महल अटारी है ।
नाम भले ही कंगना है , पर तीखी तेज कटारी है ।।

खुली चुनौती दे डाली है , जो सरकार अघाड़ी है ।
मायानगरी काँप रही , सिंहनी इस बार दहाड़ी है ।।

सहमी सहमी थी मुंबई , झांसी की रानी आती है ।
बॉलीवुड की फ़िजा विषैली , सबको राज बताती है ।।

ज़हर यही था जिसके कारण , लाल बिहारी चला गया ।
कुटिल चाल में एक रिया की ,प्रतिपल ही बो छला गया ।।

जो सबको जीना सिखलाये , वह कैसे मर सकता है ।
कितनी भी मजबूरी हो , सुसाईड नहीं कर सकता है ।।

मुम्बई के नेता अभिनेता , जो हरदम रहते ऐंठे हैं ।
होंठ सिले जाने किस बिल में , चूहे बनकर बैठे हैं ।।

बॉलीबुड के सरदारों की , एक ट्वीट ना आती है ।
कंगना के संग दिखने में , क्यों हार्टबीट बढ़ जाती है ।।

राष्ट्र धर्म ना व्यक्ति बड़ा है , इनको चिंता फिल्मों की ।
टीवी पर भाषण देकर के , बात करेंगे जुल्मों की ।।

उठता है कुछ धुंआ जहाँ से , आग वहीं पर लगती है ।
छोटी सी चिंगारी भी एक , ज्वाला बनकर जलती है ।।

इतना गुरुर है सत्ता का , सरे आम डाँटने लगते हो ।
उंगली दिखलाने वालों के , हाँथ काटने लगते हो ।।

प्रश्न करेगा जो तुमसे , तुम उसका मकां गिराआगे ।
जोड़ मराठी अस्मत से , तुम अपनी दुकां चलाओगे ।।

मणि कर्णिका गिरवाने की , इतनी भी क्या जल्दी थी ।
नोटिस के संग जेसीबी ,ऑफिस तुड़वाने चल दी थी ।।

किसकी ढाल बने हो उद्धव , मान किसे तुम चचा रहे ।
धौंस जमा कंगना के ऊपर , बोलो किसको बचा रहे ।।

गैरों से गठबंधन कर के , बीज अनोखा बो डाला ।
स्वाभिमान बाला साहब का , कुर्सी खातिर धो डाला ।।

क्यों इतना तुम दबे हुये हो , बॉलीबुड के खानों से ।
बॉलीवुड को मुक्त करा दो , बस दो तीन घरानों से ।।

नचने वाले भांड़ कभी , आदर्श नहीं हो सकते हैं ।
सस्ते सौदे जीवन के , संघर्ष नहीं हो सकते हैं ।।

बात अगर अब निकली है तो , दूर तलक वह जाएगी ।
किसकी कितनी है बिसाद ,अब ढँग से नापी जाएगी।।

साधु वेश में कालनेमि जो , वस्त्र उतारे जाएंगे ।
जीवित जितने रावण हैं , गिन गिन के मारे जाएंगे ।।

भारत की नारी ने जब भी , राजा को ललकारा है ।
इतिहास गवाही देते हैं , कुल नाश करा के हारा है ।।

मकान भले ही गिरा दिया पर , उसे गिरा ना पाओगे ।
अपनी इस गलती पर उद्धव,सिर धुन धुन पछताओगे ।।

जय हिंद जय भारत, जय वीर शिवाजी


अंधभक्तों के लिए चाहे बोलीवूड की अर्धनग्न नचनिया झांसी की रानी हो सकती है पर हमारी तो वही बुंदेलखंड वाली विरांगना झांसी की रानी है।सबकी अपने-अपने संस्कारों के आधार पर पसंद नापसंद होती है।हमें कोई एतराज नहीं है। कंगना अंधभक्तों को नाचना शिखायेगी और बुंदेलखंड वाली विरांगना झांसी की रानी हमें विराता शिखाती है ।देश के लिये मर-मिटने की प्रेरणा देती है। अंधभक्त कुछ सालों बाद कंगना को भूल जायेंगे और ऐसी नचनिया बोलिवुड में आती-जाती रहेगी पर विरांगना झांसी की रानी को लोग सदियों तक याद रखेंगे।झांसी की रानी की मूर्ति के सामने नतमस्तक होकर फूल चढ़ाते रहेंगे। ऐसी विरांगना न भूतो न भविष्यति।



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