अक्षय की लक्ष्मी बॉम्ब को बैन करने की मांग, लव जिहाद फैलाने का लग रहा आरोप

           

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विधर्मियों ने अपने प्रचार में पूरी ताकत लगाई .....

आज हमारे पास अपने धर्म के प्रचार प्रसार के लिए कोई ठोस योजना ही नहीं है.... आज यदि किसी से वैदिक धर्म के रक्षा की बात करें तो वह सुनना ही नहीं चाहता है... समय नहीं है... काम बहुत है... यह कह कर इस विषय को टाल देता है...

हमारे धर्म पर चारों तरफ से आक्रमण हो रहा है... कहीं वैदिक धर्म को समाप्त करने का षडयन्त्र किया जा रहा..... तो कही खुले-आम धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है... कहीं जबरदस्ती धर्मान्तरण किया जा रहा है...
हम ऐसे रहते हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं है ... सब ठीक है बेफिक्र हैं ...

प्रातः सोकर जगते हैं , नहा धोकर अपने काम पर निकल जाते हैं ......शाम को हारे थके आकर सो जाते हैं ... हमें धर्म से क्या लेना देना है... अपने घर की किस्त ... गाड़ी की किस्त भरनी है पैसा चाहिए तो काम करना ही होगा.... लगे हैं अपने उधेड़ बुन की जिन्दगी में...

जोर जोर से अजान....तो कहीं घण्टे की अवाज हमारे कानों में आती है और हम कहते हैं कि ये कितने समय के पक्के है.... सब काम छोड़ कर अजान पढ़ते हैं ....

हम क्या कर रहे हैं ... हमारे पास क्या योजना है...कुछ भी नहीं बस दूसरों की प्रशंसा करते रहना है....

आधुनिकता के नाम पर... समय के न होने की दलील देकर के...
हमने अपने धर्म की पहचान चोटी और जनेऊ का त्याग कर दिया...क्योंकि शर्म आती है...

अपनी धोती कुर्ता जैसी वेश भूषा का त्याग कर दिया...क्योंकि हम अपने आपको गंवार महसूस करते हैं ...

अपनी मातृभाषा को बोलना छोड़ दिया... क्योंकि अपने आपको अनपढ़ समझने लगते है...

परिवार के बड़ों के साथ में बैठकर खाना पीना छोड़ दिया....क्योंकि किसी को तमीज नहीं है ऐसा सोचते हैं ...

बडों के साथ रहना छोड़ दिया...क्योंकि ये पुराने विचारों के हैं ...

विद्वानों को घर बुलाना छोड़ दिया...क्योंकि आपको लगता है कि ये बेकार का समय बर्बाद करते हैं ..

सत्संग में जाना छोड़ दिया...क्योंकि अधिकतर सत्संग प्रातः हुआ करते हैं तब आपका सोने का समय होता है...

अच्छी पुस्तकों को पढना छोड दिया....क्यों कि आप को एैसी पुस्तकों में कोई रूचि ही नहीं आती है...

पार्टियों में पाश्चात्य कपड़े पहन कर नाच गान करते हैं ..... हम पाश्चात्य संस्कृति के अनुसार रहना पसंद करते हैं ...

हमारा खान-पान बेढ़ंग का हो गया है...हम अपने धर्म से बहुत दूर जा चुके हैं ..

.वो दिन दूर नहीं कि हमें अपने धर्म के बारे में कुछ भी पता नहीं होगा... हम भी अन्य धर्मों में मिल जाएंगे...

आज अन्य विधर्मी हमारे धर्म की नकल करके हमें गुमराह कर रहे हैं ... हमें अपनी ओर आकर्षित करने के लिए... पीछे मूर्ति लगा कर आगे जनेऊ चोटी और गेरुए वस्त्र धारण करके अपने विचारों का प्रचार कर रहे हैं .. जिससे कि सामान्य जनता को धोखे में रख सके...

हमारे ही धर्म की बातों को हमसे लेकर उसकी वैज्ञानिक कारणों को दिखाते हुए अपनी खोज बता रहे है..

हम उनकी प्रशंसा करते नहीं थकते हैं ..वो हमसे ही चुरा कर हमें ही आकर्षित करते हैं .
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हम अभी भी नहीं जागे तो जो कुछ बचा है वो भी नहीं बचने वाला है..
प्रातः शीघ्र जाग कर नित्य कर्म करके ...दोनों समय संध्या हवन करें...
भोजन सभी साथ में ही करें...

परिवार में बडों के साथ रहें .. विद्वानों को समय समय पर बुलाकर पारिवारिक सत्संग करते रहें ...

अपने मातृभाषा का प्रयोग करें... अपने धर्म की पहचान, चोटी और जनेऊ को धारण करें..

अपने परम्परा के अनुसार वस्त्र धारण करें...

यदि इन सभी कार्यों को करते हैं तो औरों को प्रेरित करें...

नहीं करते तो आज से ही प्रारम्भ करें... ताकि हमारे धर्म की रक्षा हो सके...
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डाँ० दयानिधि सेवार्थी
वैदिक प्रवक्ता


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