Ghulam Nabi के बयान से नाराज अधीर रंजन, बोले-Rahul Gandhi पर उंगली उठाना सही नहीं

अधीर रंजन बोले- ऐसे बयान अवसरवादी हैं #Video

           

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ऐसा लगता है कि #भारत में #कोरोना बीमारी कम बल्कि #सरकार का पिट्ठू ज़्यादा है ...

मेरा आज भी यह मानना है कि अगर इस समय भी #बिहार या #बंगाल या फिर किसी और राज्य में विधानसभा के #चुनाव होते तो #कोरोना क़ाबू में होता । बिना मास्क लाखों लोगों की रैलियाँ हो रहीं होतीं और हज़ारों की लाइन में लगकर जनता बिना मास्क के ही वोट दे रही होती । ना कोई दस घंटे की हवालात होती और ना ही कोई 2000 का जुर्माना होता ।
सारा फ़साद आम जनता को परेशान करके वसूली करने का है । शादी ब्याह टाले नहीं जा सकते और जनता इधर से उधर भागेगी । जितना इधर से उधर जाएँगे उतना ही शिकारियों के जाल में फँसकर अपना चालान कटवाएँगे ।

दूसरे अभी कुछ दिनों में #वैक्सीन नाम की दुधारू गाय भी बाज़ार में आने वाली है । उस गाय से अधिकतम दूध निकाला जा सके और एक हज़ार रुपए की #वैक्सीन को ब्लैक में दस - दस हज़ार में बेचा जा सके इसके लिए भी #कोरोना के भय का माहौल बनाया जाना ज़रूरी है । वरना कोई कारण नहीं है कि इस देश में जो #नरभक्षी_मीडिया सुशांत की मौत के बाद अगले तीन महीने तक एक भी ख़बर #कोरोना के ऊपर नहीं दिखा रहा था वही अब पूरे पूरे दिन #कोरोना का #हव्वा खड़ा कर रहा है । चार - पाँच महीने की गहरी नींद के पश्चात् मीडिया के #पिशाच ऐसे ही नहीं जाग गए हैं बल्कि #सीरम_इंडिया जैसी बड़ी कम्पनियों के इशारे पर ता था थैया करते हुए #वैक्सीन के लिए माहौल तैयार कर रहे है ।

भारत सरकार #कोरोना के नाम पर देश में लगातार अघोषित #आपातकाल लगाकर बैठी है । इसके कई लाभ सरकार को हो रहे हैं । सबसे बड़ा लाभ सरकार को यह है कि अब वह मन माफ़िक़ क़ानून बना पा रही है । सरकार के बनाए ख़राब से ख़राब क़ानून का भी विरोध कहीं नहीं किया जा सकता । सरकार अपनी सबसे बड़ी सम्पत्ति रेल को भी इस कोरोना के माहौल में आसानी
से बेच पाएगी । ख़रीददारों के नाम पूरा देश पहले से ही जानता है । सरकार को बस दो नामों में से किसी एक के नाम की घोषणा करनी है और रेल चुटकियों में नीलाम हो जाएगी । #रेल का निज़ी क्षेत्र में चला जाना स्वतंत्र भारत के इतिहास में घटी सबसे बड़ी आर्थिक घटनाओं में से टॉप की घटना होगी । और हो भी क्यूँ नहीं , आख़िर देश के कण कण में समाई भारतीय रेल जैसी बेशक़ीमती सम्पत्ति बिक जाना पूरे भारत को प्रभावित करेगा । एक एक स्टेशन का वेल्यूएशन इतने रुपए का होगा कि असली क़ीमत में बड़े से बड़ा धन्ना सेठ भी रेल को नहीं ख़रीद सकता सो लम्बी प्लानिंग ज़रूरी है । मेरे पास सबूत तो नहीं है लेकिन इस बात के आसार पूरे हैं कि रेल को केवल #कोरोना फैलने के भय से बंद नहीं रखा गया है बल्कि उसको बेचे जाने की गुप्त प्रक्रिया अंदर खाने चलाई जा रही है और अगले कुछ महीनों में #कोरोना ख़त्म होने की घोषणा हो ना हो लेकिन #रेल के बिक जाने के घोषणा ज़रूर कर दी जाएगी ।

क्या सामान्य दिनों में रेल को इतनी आसानी से कोई सरकार बेच पाती ..? नहीं ना ...? इसीलिए कोरोना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है इस सरकार के लिए भी और सरकार को बनाने या बिगाड़ने वाले बड़े कारोबारियों के लिए भी । यही हाल #BPCL_IOCL_HPCL जैसी बेशक़ीमती महारत्न कम्पनीज़ का होने वाला है । #रुपए_का_माल_पैसे_में_बिकना है तो #कोरोना ज़रूरी है ।

रही बात कोरोना के नाम पर आम जनता के कारोबार ख़त्म हो जाने की तो वो कौन सी पहली बार है ..! आम जनता तो इस देश में पैदा ही इसलिए हुई है ताकि वह अपना #तूतिया कटवा सके । फ़िलहाल तो देश में बहुमत भी ऐसी जनता का ही जान पड़ता है जो यही सब डिज़र्व भी करती है ।

#अंधेर_नगरी

#DharamVeerLive

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