कृषि कानूनों पर रोक, Committee का गठन, फिर भी भड़के हुए किसान! देखें क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर फिलहाल के लिए रोक लगा दिया है. इस दौरान किसानों के मुद्दे को सुलझाने के लिए कोर्ट ने 4 लोगों की कमेटी का गठन किया है. #FarmBills #Video

           

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क्या कारण है कि प्याज संकट सितंबर से फरवरी और BJP राज में ही शुरू होता है? इसका कारण है कि सितंबर में सर्वाधिक उमस होने से हर जल-जनित खाद्य पदार्थ तत्काल सड़ने लगता है, जिससे अन्य पदार्थ तो दूबारा गर्म हो सकते हैं, लेकिन कटा प्याज न तो अग्नि पर रखा जा सकता, नाहि फैंकने का मन करता। 2 मिनट पहले कटा प्याज प्रयोग हो सकता है, लेकिन होटलों में घंटों पहले का कटा प्याज होता है, जिससे भारतीयों को बीमारी से बचाने के लिए प्रकृति सितंबर से प्याज संकट की शुरुआत करती है।

प्रकृति नियमानुसार कोई भी वस्तु जिस समय, स्थान और मौसम में उपयोगी होती है, उसी अनुसार वहाँ प्रचुर पैदा होती है। भारतीय मौसम अनुसार 7 महीनों की गर्मी उपरांत पौष्टिक तत्व जरूरी होने तथा गर्मी ढ़लान, शीत ऋतु शुरू होने से पाचन क्रिया नवंबर से फरवरी तक अच्छी होने से हाजमेदार और स्वादिष्ट की बजाय शक्तिवर्धक खाद्यान्न प्रयोग करने चाहिएं। इसलिए कुछ पदार्थ कम प्रयोग करने पड़ते हैं, अन्यथा बेमेल भोजन नुकसान करेगा। इसलिए सितंबर से फरवरी तक प्याज न्यूनतम प्रयोग करें।

BJP राज को व्यापारी हितैषी पार्टी का हौआ बना दिया जाता है। मैं हर सब्जी दूगने भाव तक ही प्रयोग करता हूँ। सीजन के भाव से 2 गुणी दर होते ही आलू, टमाटर, प्याज, लहसुन इत्यादि, या तो अगले मौसम में ही या फिर सीमित मात्रा में उपयोग करता हूँ, जिससे मुझे महंगाई अहसास कतई नहीं होता। सभी देशवासी ऐसा करें तो मुनाफाखोर फड़फड़ाने लगेंगे। जनता को लूटने वाले कालाबाजारियों के सामने झुकना नहीं, उन्हें झूकाने के लिए गैर-सीजनल वस्तु 40-50% कम प्रयोग करते ही, लूटेरे खुद लुटना शुरू हो जायेंगे।

एक सैनिक, बर्फीले या Border area में, नितांत अकेला, घंटों बिना जल के खुद को स्वस्थ्य रख सकता है, तो अनेकों सुख-साधन में एक प्याज के टुकड़े के लिए कांग्रेसियों द्वारा मचाये हल्ले से वाजपेयी जी और दिल्ली में सुषमा स्वराज सरकार गिराई गई। प्याज बहाने सत्ता परिवर्तन करके भारत का धन घोटालेबाजों द्वारा विदेशों में जाए, उसकी बजाय अत्यधिक प्याज उत्पादक देश भारत के सामने तथा कालाबाजारी जनता के सामने बिलबिलाएं कि, प्याज खरीद लो। जिससे राहत मिले, ऐसी स्थिति बनाएं।

कालाबाजारियों को सुधारने का तरीका है कि, सीजन में प्रतिमाह अगर 40 रूपये की 4 किलो प्याज घर में आती है तो, गैर-सीजन में 80 रूपये तक ही खरीदें। जैसे-जैसे महंगी होती जाये, 4 किलो से 3-2-1 करते जायें। ऐसा करने से कालाबाजारी दुखी होने लगेंगे, क्योंकि नई फसल आने वाली होती है।

होटल में तत्काल कटी तथा tiffin के साथ साबुत प्याज का आदेश देने से, पहले से कटी प्याज फैंकना बंद होकर 10% बचत होगी। जब अप्रैल-मई में प्याज 10 रूपये किलो होती है तो सर्दी में 20 से ज्यादा क्यों? स्वाभाविक है कि सर्दियों में प्याज-लस्सी नहीं, मुंगफली, गूड़, तिल तथा दूध जरूरी होता है। अतः केवल छौंक में मामूली डालें। प्याज-बजट सर्दी से मात्र दूगना हो सकता है, महंगी होने से उसी अनुपात में कम प्रयोग करें।

जिस तरह करेला मई में अमृत है, सितंबर में जहर। वैसे ही मई-जून में प्याज गरीबों की संजीवनी बूटी है, और सितंबर में डाक्टरों की मौज। इसलिए बीमारियों से बचने के लिए प्याज सितंबर में तो किसी भी हालात में न खायें।

लहसुन महंगा होने पर कलौंजी प्रयोग करें। कलौंजी, लहसुन की तरह रक्तचाप संतुलित रखने के अलावा, एक कहावत है कि मौत के अलावा कलौंजी हर बीमारी ठीक करती है।


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