राहुल-प्रियंका को लेकर देश का मिजाज 20 महीने बाद भी नहीं बदला है

सर्वे बता रहा है कि राहुल गांधी जनता द्वारा नकारे जाने का रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं. (iChowk से) #RahulGandhi #PriyankaGandhi #MoodOfTheNation #Congress

           

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जब गांधारी धृतराष्ट्र की पत्नी बनकर आई तो उन्होंने भी अपने पति की तरह रहने का संकल्प लिया। धृतराष्ट्र देख नहीं सकते थे तो उन्होंने भी आंखों पर पट्टी बांध ली। वो एक अच्छी पत्नी का उदाहरण बनना चाहती थी और निस्संदेह थी भी। जब दुर्योधन पैदा हुआ तब वो एक पत्नी के अलावा एक माँ भी थी। अब इमेजिन करिए एक बच्चे के बारे में जो गलत कार्य करने से पहले ही इस बात से डर जाता है कि मम्मी पापा न देख लें। बच्चा एक ड्राइंग बनाता है और माँ बाप को दिखाता है। तारीफ सुनकर वो खुश होता है। अच्छे कामों पर उसे माता पिता का प्रोत्साहन मिलता है और अच्छा बनने की प्रेरणा भी। दुर्योधन के साथ ये सब कुछ भी नहीं था। उसके पिता देख नहीं सकते थे और माता देखना नहीं चाहती थी। उसे गलत कार्य करते वक्त इस बात का बिल्कुल डर नही था कि माँ बाप उसे देख लेंगे या अच्छे कार्य करने पर उसे प्रोत्साहित करेंगे। नतीज़ा ये हुआ कि दुर्योधन भारत के इतिहास के सबसे भयंकर युद्ध की वजह बना।

इसके विपरीत कुंती ने अपने हमेशा अपने पुत्रों पर नज़र रखी, अच्छे संस्कार दिए, गलत कार्य पर डाँटा तो अच्छे कार्य पर प्रोत्साहित भी किया। सिर्फ एक बार कुंती ने अपने बच्चों की ओर नहीं देखा और नतीजा ये हुआ कि द्रोपदी बांट दी गई जैसे वो कोई चीज़ हो। यदि द्रोपदी सिर्फ अर्जुन की पत्नी रहती तो युद्धिष्ठिर के पास कोई अधिकार न होता उसे जुएं में हारने का। बच्चों की ओर मां के एक बार न देखने का नतीज़ा ये हुआ कि उनकी बहू का चीर हरण भरे दरबार मे हुआ। जब पाण्डु की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र हस्तिनापुर के राजा बने थे तब गांधारी एक पत्नी औऱ एक मां के अलावा राजमाता भी थी। वो एक महान राज्य की माता थी और जनता उनके पुत्र समान। हस्तिनापुर के पास ऐसा राजा था जो देख नही सकता था। गांधारी को अपनी पट्टी खोल कर हस्तिनापुर की प्रजा की भलाई के लिए धृतराष्ट्र की मदद करनी चाहिए थी। एक मां के रूप में उनकी जिम्मेदारी दुर्योधन और राज्य दोनों के प्रति थी मगर इसके विपरीत उन्होंने राज्य को अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति समझा औऱ उस तथाकथित व्यक्तिगत सम्पत्ति को भोगने के लिए उन्हें किसी भी कीमत पर अपना ही बेटा चाहिए था, हर कीमत पर।

यदि वो आंखों से पट्टी हटाकर देखती तो शायद जान पाती दुर्योधन में राजा बनने के गुण ही मौजूद नहीं थे। दुर्योधन की हरकते, उसकी जिद उसका अहंकार, औऱ उसकी मूर्खता देखकर गांधारी अवश्य ये समझ जाती ये एक क्रिकेटर, फुटबॉलर या फ़िल्म एक्टर बन सकता है मगर राजा नहीं। देश को राष्ट्रीय बालिका दिवस के साथ साथ राष्ट्रीय राजमाता दिवस भी मनाने की जरूरत है जिससे पुत्रमोह में आंख पर पट्टी बांधे राजमाता के पास ये सन्देश जाए कि अपने बेटे को वही बनाओ जिसकी वो काबिलियत रखता हो।अपनी व्यक्तिगत सम्प्पति कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर अपने नकारा, अर्धविक्षिप्त,मंदबुद्धि और झूठे बेटे को हस्तिनापुर पर न थोपे। आँख की पट्टी खोलकर देखे कि वो थाईलैंड की सैर और इटली वाली रहस्यमय नानी के दर्शन करने के लिए ही पैदा हुआ है. उसे वही करने दो,ज़बरन नेता न बनाओ।

Zoya Mansoori एक अल्पसंख्यक लड़की


This all is caused to show have happened since 2012 under the well planned media management strategies. This is thats why called politics since BJP new it very well that after the then Congress leadership Mr.Rahul Gandhi will be their new leader. Congress could not understood n manage it. Moreso person like Harvard Educated only English speaking lungi wearing leader had actually weared the Congress down since 1984 by balatant anti people policies which ever Ministry or office he was made incharge of. Such people started digging up the grave for Congress which was completed by 2013. Nobody can help since all are old tired n lazy crazy leaders r poor to steady Congress ship n its also well known opportunist rats run away first n fast. Congress or opposition need to introspect their undoing of people good n mood. They should nurture n groom educated, honest young n committed leadership who should not be primarily inheriting politics from their parents but self made to read the times n change strategies n put up challange. These things were very well put in place by BJP. Like BJP have force behind them is experinced team of RSS. All others don't have anything like that. Congress became Congress by having such force of people before independence n till Mrs. Indira Gandhi became PM. Gradually, those Gandhi cap wearing common Congress workers became extinct n an elite class became parasite. For the moment, nobody is a serious challange to BJP since every other rat is looking to board the safe ship n opposition always a fragmented clueless day dreaming bed ridden force.


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