Live: 26 जनवरी को 25 हजार ट्रैक्टर के साथ दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे किसान, राजनीतिक दलों को नो एंट्र

26 जनवरी को 25 हजार ट्रैक्टर के साथ दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे किसान, राजनीतिक दलों को नो एंट्री #FarmersProtest

           

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मैं सन् 1980 से लगातार आयकर देता आ रहा हूँ - लेकिन न तो इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, चरण सिंह, राजीव गांधी, वी.पी.सिंह, चंद्रशेखर, देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटलबिहारी बाजपेयी और मनमोहन सिंह ने कभी मुझसे पूछा कि सरकार टैक्स की दर तय कर रही है- *बता तेरी क्या इच्छा है*.

मैं ही क्यों, भारत में करोड़ों लोग टैक्स देते हैं - लेकिन क्या सरकारें उनसे पूछकर नीतियां तय करती आयी हैं ? *नहीं ना.*

देश में करोड़ों श्रमिक हैं, क्या श्रम कानून इनसे पूछकर बनाए जाते हैं ? *नहीं ना.*

देश में करोड़ों व्यवसायी हैं, क्या सरकारें आर्थिक नीतियां, टैक्सेशन इनको पूछकर बनाती हैं ? *नहीं ना.*

अब किसानों की बात करते हैं, 40 करोड़ की अनुमानित संख्या वाले इस वर्ग के कितने लोग कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे हैं ? *ज्यादा से ज्यादा दस बारह लाख लोग, जिसमें बड़ी संख्या में कृषि मंडियों के बिचौलिए और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता हैं*

ये जो अपने को किसान बता रहे हैं - *क्या ये उत्तरप्रदेश बिहार या उड़ीसा से लाए गए मजदूरों को न्यूनतम दर से मजदूरी देते हैं ? क्या ये उन मजदूरों को पूरे कानूनी अधिकार देते हैं ? नहीं ना ?*

भारत बन्द की असफलता ने इस आंदोलन की हकीकत को बता दिया था कि यह दिल्ली के आसपास के कुछ बड़े किसानों और मंडी के बिचौलियों का आंदोलन है.

अब कानूनी तौर पर देखा जाए *कि कानून बनाने का अधिकार किसके पास है और वह किसके प्रति जिम्मेदार है.*

भारतीय संविधान में कोई भी कानून बनाने का अधिकार संसद और विधानसभाओं को उनके संवैधानिक कार्यक्षेत्र के अनुसार है.

*सांसद या विधायक कैसे चुना जाता है ?*

ये जनता द्वारा चुने जाते हैं और *कानून बनाने के लिए ही चुने जाते हैं.*

अब _यह एक व्यर्थ की बकवास के अलावा कुछ नही है कि कानून बनाने से पहले किसानों से क्यों नही पूछा गया ?_

क्या सरकार को कोई भी सरकार क्यों न हो, कानून बनाने से पहले एक एक किसान से पूछा जाना चाहिए कि हम यह कानून बनाने जा रहे हैं, इस पर अपनी राय दें.

जो अपने को किसान संघटन कहते हैं, वे कोई वैधानिक इकाइयां नही हैं - जिनका कोई कानूनी स्वरूप हो. जिसकी मर्जी आए वह एक संघटन बना सकता है और अपने को अध्यक्ष घोषित करे और दो चार लोगों को कार्यकारिणी या अन्य पदों पर स्थापित कर आंदोलन शुरू कर दे.

अब जरा इन कथित किसान नेताओं का प्रभाव देखिए, राकेश टिकैत अपने पिता महेंद्र सिंह टिकैत की विरासत के बावजूद चुनावों में दस हजार से कम वोट लाए थे और जमानत तक नहीं बचा पाये थे !

एक बहुमुखी चेहरा योगेंद्र यादव है - जिनकी पार्टी स्वराज अभियान हर जगह NOTA से भी आधे वोट नही ले पाती है.

ऐसे ही इसमें नेतागिरी करने वाले सी.पी.आई. और सी.पी.एम. के नेता हैं जिनका पूरे भारत में जन समर्थन खत्म हो गया है, लेकिन ये अपनी दिवालिया दुकान के चलाने के लिए बिचौलियों, दलालों और आढतियों के इस आंदोलन से *अपने खोये हुए जनाधार को ढूंढने का आखिरी प्रयास कर रहे हैं.*

मैं एक बार फिर कहूंगा कि यह कोई किसान आंदोलन नही है.

*यह सारा काम कृषि बिल के लिए नहीं, बल्कि पहले से पास हो चुके 3 तलाक, अनुच्छेद 370, CAA आदि बिलों को वापिस करवाने के लिए हो रहा है.*

इन तथाकथित बुद्धिजीवियों और राजनेताओं का काम ही किसी भी गैर कांग्रेसी सरकार के हर कार्य का विरोध करना है.

*इनको मोदी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है - क्योंकि मोदी ना खाता है, ना खाने देता है. जाहिर है कि सभी मौकापरस्तों की दुकानें बंद होने के कगार पर आ चुकी हैं.*

_इसलिए सारा विरोध अपना वजूद बचाने के लिये है._
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कोपी पेस्ट


अमीर किसानों दलालों आरतियां और मोदी जी से निवेदन है की...
कानून को वापस किसी भी कीमत पर नहीं लेना है क्योंकि यह कानून सिर्फ उन 14% अमीर किसानों और दलालों के लिए नहीं है यह बाकी के 86% गरीब किसानों के लिए है जो आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं और इन दलालों से हाथ जोड़कर निवेदन है कि समझे सिर्फ धान और गेहूं की खेती करने वाले एमएसपी पाने वाले अमीर किसान और दलालों आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि पोल्ट्री दलहन तिलहन से लेकर के जो जितने और सारे कृषि संबंधित काम है यह बिल उन सबके लिए है और आपसे भी निवेदन है कि धान और गेहूं के अलावा भी आप फ्रूट्स हो गए, सब्जियां हो गई , दलहन हो गए , तिलहन हो गई, फिशरीज हो गई, पोल्ट्री हो गया उस खेती की तरफ आ जाएं तो आपका ही नहीं पूरे देश का भला होगा नहीं तो आप गेहूं और धान उगाते रहिए आप गेहूं गाते रहिए वह एफसीआई के गोदामों में सड़ता रहेगा सुखबीर सिंह बादल उस सड़े हुए गेहूं से शराब बनाता रहेगा और तुम्हारा पंजाब उड़ता पंजाब ही रहेगा हमेशा,,, समझो इस खेल को मेरे भाइयों अब दलाल हैं भारतीय हैं मंडी के कमीशन खोर हैं मान ली आपकी बात आपकी चिंता जायज है करेंगे आपका भी कुछ मोदी सबकी चिंता करेगा यह देश भक्त लोग हैं और आप तो सबसे आदरणीय हैं सिख इस देश की शान है लेकिन थोड़ा सा गरीब किसानों का भी सोचे आप हाथ जोड़कर विनती है आप लोगों से....


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