#AnchorChat: क्या लॉकडाउन और नाईट कर्फ्यू से कंट्रोल होगा कोरोना?

#AnchorChat: क्या लॉकडाउन और नाईट कर्फ्यू से कंट्रोल होगा कोरोना #AnchorChat में पूछिये रोहित सरदाना से सवाल। #ExtensionStudio #Dangal #ATFBLive

           

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आज तक का रिपोर्टर तो शाहनवाज के लेक्चरबाजी के समय वह मौजूद था जो शाहनवाज ने खुद कहा है । तो क्या उस रिपोर्टर ने पत्थर फेकते हुए या पत्थर शाहनावज के पास जाते हुए या उसके पास गिरते हुए या शाहनवाज को उसकी और पत्थर जाते समय अपना बचाव करते देखा । नही । कुछ भी नही, वास्तव में शाहनवाज ने पत्थर हाथ मे पकड़ कर दिखाया की पत्थर उस पर किसी ने फेका था जो मनगढ़ंत कहानी उसने हाथ में छोटा पत्थर दिखाते हुए सुनाई। और क्या आपने वो सुना जो उसने चैनल पर बताया कि डायस पर उसके साथी ने उसे पत्थर देते हुए बताया की एक पत्थर फेका गया है । मतलब साफ है कि उससे कहा गया की पत्थर दिखाओ और बोलो कि उस पर पत्थर फेका गया है। मतलब, किस्सा बनाया गया।


रात 11 बजे कोरोना से मुलाकात हो गई .

चलते चलते 6 फीट दूर से बात हो गयी

मैंने कहा कोरोना बड़ा ऊधम मचाए हो .

चुनावी रैली छोड़कर क्यों मेलों ,शादी और कवि सम्मेलनों में आए हो .

क्या तुमको भी लगता है़ डर सरकारी आयोजनों से .
या लाए गए हो तुम भी किन्हीं प्रयोजनों से

अब मैं तुमसे तुम्हारा इलाज चाहता हूँ .
कल या परसो नही अभी और आज चाहता हूँ .

ये सुनकर कोरोना रुआंसा होकर बोला

कवि महोदय तुम सब की पीड़ा गाते हो .
मैं भी तो पीडित हूँ क्यों ना मेरी व्यथा सुनाते हो .
मैं तो पहले आया था लेकिन अब बुलाया है़ .
सत्ता के सरदारों ने मुझको हथियार बनाया है़ .
उनकी मर्जी से ही अब मैं अंदर बाहर जाता हूँ .
फिर भी जाते जाते तुम्हें मैं अपना इलाज बताता हूँ .
जहाँ जहाँ हिन्दुस्तान में चुनाव कराया जाएगा .
वहाँ कोरोना का एक भी मरीज नही पाया जाएगा .
देश की भोली जनता में समझ का अभाव है़ .
सुनो कविवर मेरा इलाज सिर्फ और सिर्फ चुनाव है़


*संस्कार-*

श्री टी.एन. शेषन जब मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तो परिवार के साथ छुट्टीयां बिताने के लिए मसूरी जा रहे थे। परिवार के साथ उत्तर प्रदेश से निकलते हुऐ रास्ते में उन्होंने देखा कि पेड़ों पर गौरैया के कई सुन्दर घोंसले बने हुए हैं। यह देखते ही उनकी पत्नी ने अपने घर की दीवारों को सजाने के लिए गौरैया के दो घोंसले लेने की इच्छा व्यक्त की तो उनके साथ चल रहे। पुलिसकर्मियों ने तुरंत एक छोटे से लड़के को बुलाया, जो वहां मवेशियों को चरा रहा था.उसे पेड़ों से तोड कर दो गौरैया के घोंसले लाने के लिए कहा। लडके ने इंकार मे सर हिला दिया। श्री शेषन ने इसके लिए लड़के को 10 रुपये देने की पेशकश की। फिर भी लड़के के इनकार करने पर श्री शेषन ने बढ़ा कर ₹ 50/ देने की पेशकश की। फिर भी लड़के ने हामी नहीं भरी। पुलिस ने तब लड़के को धमकी दी और उसे बताया कि साहब ज़ज हैं और तुझे जेल में भी डलवा सकते हैं। गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

लड़का तब श्रीमती और श्री शेषन के पास गया और कहा,- "साहब, मैं ऐसा नहीं कर सकता। उन घोंसलों में गौरैया के छोटे बच्चे हैं अगर मैं आपको दो घोंसले दूं, तो जो गौरैया अपने बच्चों के लिए भोजन की तलाश में बाहर गई हुई है, जब वह वापस आएगी और बच्चों को नहीं देखेगी तो बहुत दुःखी होगी जिसका पाप मैं नहीं ले सकता"

यह सुनकर श्री टी.एन. शेषन दंग रह गए। श्री शेषन ने अपनी आत्मकथा में लिखा है-"मेरी स्थिति, शक्ति और आईएएस की डिग्री सिर्फ उस छोटे, अनपढ़, मवेशी चराने वाले लड़के द्वारा बोले गए शब्दों के सामने पिघल गई। "पत्नी द्वारा घोंसले की इच्छा करने और घर लौटने के बाद, मुझे उस घटना के कारण अपराध बोध की गहरी भावना का सामना करना पड़ा"

जरूरी नहीं कि शिक्षा और महंगे कपड़े मानवता की शिक्षा दे ही दें। यह आवश्यक नहीं हैं, यह तो भीतर के संस्कारों से पनपती है। दया, करूणा, दूसरों की भलाई का भाव, छल कपट न करने का भाव मनुष्य को परिवार के बुजुर्गों द्वारा दिये संस्कारों से तथा अच्छी संगत से आते है अगर संगत बुरी है तो अच्छे गुण आने का प्रश्न ही नही है।



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