वैक्सीन पर सियासी हंगामा: AAP का केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन, कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा

वैक्सीन के एक्सपोर्ट के खिलाफ AAP का प्रदर्शन; कांग्रेस ने कहा- वैक्सीन लेना सबका अधिकार है

           

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दिल्ली हाई कोर्ट में जब दिल्ली सरकार के कर्मचारियों और दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों को पिछले 6 महीने से सैलरी नहीं मिलने का मामला उठा और जब दिल्ली हाईकोर्ट ने तमाम दस्तावेजों के साथ दिल्ली सरकार के प्रकाशन विभाग से यह पूछा कि आपने सिर्फ 1 साल में अपने नेता के प्रचार के पीछे कितना खर्च किया है? कृपया डॉक्यूमेंट के साथ बताइए

फिर जब दिल्ली सरकार के प्रचार विभाग ने हाईकोर्ट को बताया कि मात्र 1 साल में दिल्ली सरकार ने अरविंद केजरीवाल के चेहरे के प्रचार के पीछे 830 करोड रुपए खर्च किए

उसके बाद तो जज साहब का पारा चढ़ा उन्होंने कहा कि इस कोविड काल मे भी आप अपने कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे रहे आप को तीनों नगर निगम को फंड एलोकेशन करना होता है आपने फंड का एलोकेशन नहीं किया और आप सारा पैसा अपने प्रचार के पीछे कर रहे हैं


क्या आप जानते हैं कि...
ब्रिटेन में 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को ही कोरोना वैक्सीन लगायी जा रही है, फ्रांस में 60 वर्ष से अधिक तथा ऑस्ट्रेलिया में 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीन लगायी जा रही है। अमेरिका में भी बिना किसी आयु सीमा के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की अनुमति 12 दिन बाद 19 अप्रैल से दी जाएगी। अभी तक वहां भी आयु सीमा के अनुसार ही वैक्सीन लगायी जा रही है।
ध्यान रहे कि रूस की वैक्सीन सवालों के घेरे में है और चीन की वैक्सीन की गुणवत्ता को दुनिया के अधिकांश देश नकार चुके हैं। विश्व में कोरोना वैक्सीन का उत्पादन मुख्यतः केवल तीन देश भारत अमेरिका ब्रिटेन ही कर रहे हैं। इसके बावजूद इन देशों में वैक्सीन लगाने के लिए आयु सीमा को प्राथमिकता क्यों बनाया गया है.? इसका कारण यह है कि भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना के कारण जिन लोगों की मृत्यु हुई है उनमें 85 प्रतिशत की आयु 50 वर्ष या उससे अधिक थी। इनमें भी 60 और 70 वर्ष की आयु वाले लोगों की संख्या अधिक थी। अतः पूरी दुनिया के देश यह प्रयास कर रहे हैं कि वह सबसे पहले अपने उन नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करें जिनको कोरोना से ज्यादा खतरा है।
सबको वैक्सीन लगाने की अनुमति देने के लिए राजनीतिक हंगामा हुड़दंग बवाल कर रहे केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और कांग्रेसी नेताओं को किसी और के बजाय AIIMS के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के सवाल का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कल ही यह बताया है कि देश में वैक्सीन की उपलब्धता इतनी नहीं है कि सबको एक साथ लगा दी जाए। सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन बाहर भेजे जाने के विषय में भी डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने जानकारी दी है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत दूसरे देशों को भी एक निश्चित संख्या में वैक्सीन देना सीरम की बाध्यता है क्योंकि वो जिस वैक्सीन कोविशील्ड का उत्पादन कर रहा है वो उसकी नहीं है।
उपरोक्त सच्चाइयों से पूर्ण रूप से परिचित होने के बावजूद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और कांग्रेसी नेता इस बात पर भी राजनीतिक हंगामा हुड़दंग बवाल कर रहे हैं कि वैक्सीन दूसरे देशों को क्यों भेजी जा रही है.?
अतः इन लोगों की मंशा का अनुमान आप सहज रूप से स्वयं ही लगा सकते हैं। फिलहाल वैक्सीन की सीमित उपलब्धता के कारण आयु सीमा अगर लागू नहीं की गयी तो बड़ी संख्या में कोरोना बुजुर्गो की जिंदगियों को लीलने लगेगा।
अतः देश को बरगलाने भड़काने के लिए किए जा रहे राजनीतिक धूर्तों के हंगामे हुड़दंग और बवाल से सावधान रहिये अन्य लोगों को भी सावधान करिये और निश्चिंत रहिये कि अति शीघ्र यह वैक्सीन देश के सभी आयुवर्ग के लोगों को सर्वसुलभ होगी क्योंकि 4 अन्य शत प्रतिशत भरतीय वैक्सीन अपने ट्रॉयल का अंतिम चरण पूर्ण कर रहीं हैं। लेकिन तब तक थोड़ा धैर्य रखिए। यह ध्यान रखिये कि जो राजनीतिक धूर्त अपनी क्षुद्र राजनीतिक लिप्साओं की पूर्ति के लिए जिन बुजुर्गों की जिंदगियों को दांव पर लगा देने की जहरीली जिद्द कर रहे हैं। वह बुजुर्ग हमारे आपके घरों के भी हो सकते हैं। ऐसे राजनीतिक धूर्तों और उनकी जहरीली जिद्द के खिलाफ आपका हल्लाबोल हमारे आपके बुजुर्गों के प्राणों की रक्षा करेगा। satish chandr mishra


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