लखीमपुर काण्ड पर कांग्रेस-बीजेपी के बीच हल्ला बोल

लखीमपुर हिंसा के विरोध में कांग्रेस का मौन व्रत. बीजेपी का आरोप, कांग्रेस राजनीति कर रही है देखें #हल्ला_बोल #lakhimpurkheri #BJP #Congress

           

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2022 के विधान सभा चुनावों के "प्रचार" में
राम जी आएंगे,गौ माता आएंगी,मन्दिर और
मस्जिद आएंगे, श्मशान~कब्रिस्तान आएंगे,
अब्बाजान आएंगे तो कभी चचाजान आएंगे,
हिन्दू~मुसलमान आएंगे....राम द्रोही आएंगे
देशद्रोही आएंगे......आन्दोलनजीवी आएंगे,
आतंकवादी आएंगे..... खालिस्तानी आएंगे,
तालिबान आएगा.... तालिबानी आएंगे......
पाकिस्तान आएगा... लव जिहाद आएगा...
हर तरह के जेहाद का जिक्र आएगा.....फिर
हिंदुओं का पलायन आएगा... धर्म परिवर्तन
(मतांतरण/धर्मांतरण) का मुद्दा आएगा......
हिन्दू/हिंदुत्व खतरे में आएगा.. भावनात्मक
मुद्दे उठाये जाएंगे,हर वो मुद्दा उठाया जाएगा
जिससे लोगों की "धार्मिक भावनायें" भड़कें..
ताकि जनता अपनी मूल समस्याओं को भूल
कर भावनाओं में बहती चली जाएं...महंगाई,
बेरोजगारी,भुखमरी,शिक्षा और स्वास्थ जैंसे
जनता से जुड़े मुद्दों से #ध्यान हटाया जाएगा
भावनात्मक माहौल बनाया जाएगा,तब कहीं
जाकर 5~7 चरणों का #चुनाव सम्पन्न हो
पाएगा


क्या बीजेपी में दो फाड़ हो चुकी है?

बीजेपी के प्रवक्ता आलोक वत्स गृह राज्यमंत्री टेनी को उनकी नैतिक जिम्मेदारी याद दिला रहे हैं. एनडीटीवी पर उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी में भी ऐसा हुआ है कि लोगों ने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया है. अब वे नहीं दे रहे हैं तो नैतिकता के बारे में उनका अपना पैमाना होगा.' हूबहू शब्द मुझे याद नहीं है, लेकिन सार कुछ ऐसा ही था. उन्होंने इस्तीफा न देने के लिए मंत्री को जिम्मेदार ठहराया. अब सवाल है कि क्या मजबूत प्रधानमंत्री का अपने मंत्रिमंडल पर ही नियंत्रण नहीं रह गया है? यह समझना मुश्किल है कि प्रधानमंत्री या बीजेपी चाह रही है लेकिन टेनी पद नहीं छोड़ रहे हैं.

यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी कार्यकर्ताओं को याद दिला चुके हैं कि हम सत्ता में किसी को कुचलकर मारने के लिए नहीं आए हैं.

यही बीजेपी दो दिन पहले तक मानने को तैयार ​नहीं थी कि मंत्रीपुत्र ने कुछ किया होगा. मुख्यमंत्री भी साफ साफ कह रहे थे कि सिर्फ आरोप के आधार पर, बिना सबूत के किसी को पकड़ा नहीं जा सकता. पूरी पार्टी, केंद्र सरकार और राज्य सरकार जिसके बचाव में खड़ी थी, लेकिन अब बीजेपी के सुर बदलते दिख रहे हैं.

हालांकि, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अब भी मौन हैं. उन्होंने​ किसानों के बारे में तो जाने दीजिए, अपने कार्यकर्ताओं की मौत पर भी एक शब्द नहीं कहा. उल्टे जब मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार हो रहे थे, तब प्रधानमंत्री उसी राज्य की राजधानी में घटनास्थल से दो सौ किलोमीटर दूर अमृत महोत्सव मना रहे थे. उन्होंने विपक्षी हंगामे और किसानों की चेतावनी के बावजूद अब तक अपने मंत्रिमंडल से मंत्री को नहीं हटाया है.

आप गौर से देखिए ​तो लगता है कि इस मसले पर ​बीजेपी नेतृत्व और प्रदेश सरकार का रवैया अलग अलग है. प्रधानमंत्री अपने मंत्री पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. पार्टी के दोनों आला नेता मौन हैं. मंत्री अपने पद पर बने हुए हैं और अपने बेटे को बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं. लेकिन कुछ बीजेपी नेता अब लखीमपुर कांड की निंदा कर रहे हैं. यूपी सरकार भी बड़ी फजीहत के बाद अब पुलिस को कार्रवाई करने दे रही है.

कभी लगता है कि पार्टी इस मसले पर बंट गई है लेकिन दूसरा पक्ष यह हो सकता है कि पार्टी डैमेज कंट्रोल करने के लिए एक शातिराना चाल चल रही हो कि उनकी पार्टी भी इसे गलत मानती है लेकिन मंत्री ही जिद पर अड़े हैं.


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