देखिए हल्ला बोल

मानवाधिकार पर सियासी पार्टियों की अपनी-अपनी परिभाषा? देखिए हल्ला बोल #India #Politics #UttarPradesh #LakhimpurViolence #HallaBol #हल्ला_बोल

           

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सांसद खरीदो बिधायक खरीदो ओर सच बोलने वालो का मूह बन्द कर दो खुद मोटे मोटे पैशन के साथ ओर सुविधा का उपयोग करो ओर जो जिन्दगी भर सरकारी नोकरी करे उसे पैशन तक ना दो लाशो को गंगा मे बताओ मंहगाई कम करने का बादा आपने किया था देख लो अपनी पुरानी विडिओ जब आप प्रधानमंत्री थे तब क्या क्या कहते थे सब भूल गये ओर आप जैसे मानवाधिकार की बात ना करे तो अच्छा है भूलिए मत गोधरा कांड मे किस किस का नाम आया था श्रीमान। आप ये महंगाई कम कर दो गैस पैट्रोल डीजल सरसो तेल ओर दाल के व अन्य सामान के दाम आपने कार्यकाल मे तिगुना हो गया है उसको कम कर दिजिए बस ताकी गरीब दो वक्त की रोटी चैन से खा सके ओर कुछ नही चाहिए श्रीमान मोदी जी


कई News channels and anchors का स्तर भी गिरता जा रहा है इसी कारण से भारतीय राजनीति का स्तर भी बुरी तरह से गिर चुका है। ये न्यूज चैनल्स पूंजीपतियों और राजनेतिक दलों की कठपुतली बन चुके हैं।
भारत की राजनिति शुरू से ही किसानों, आरक्षण, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन, राजनीतिक परिवारवाद तथा माफिया के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई है।
"और जो करोड़ों इंसान ऊपर दी गई किसी श्रेणी में नहीं आते वो हैं भारत के आम इन्सान जो सिर्फ वोट देने के लिए पैदा हुए हैं, फिल्म स्टार्स की अरबों की दौलत बढ़ाने और आजीवन नेताओं से बेवकूफ बनने का अधिकार रखते हैं।"


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