उन्नाव रेप: पीड़ित लड़की के पिता का इलाज करने वाले डॉक्टर की संदिग्ध हालत में मौत

14 जनवरी को इस केस से जुड़े मामले में तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई होनी थी.

           

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2014 में मोदीजी के सत्ता में आते ही 110 डालर प्रति बैरल तेल 60 डालर होने से 112 अरब डालर प्रतिवर्ष आयात की बजाय 64 अरब डालर होने से एक तरफ तो खाड़ी देशों से धर्म परिवर्तन के लिए धन आना बंद हुआ तो, दूसरी ओर भारत का 48 अरब डालर (48×70 = 3360 अरब) 33.4 खरब रूपया तेल आयात के नाम पर विदेशों में जाना बंद होने से, नातो कांग्रेसियों को मोदी विरोध का कोई बहाना मिला, नाहीं महंगाई असर हुआ। तेल महंगा होने की उम्मीद में गिद्धदृष्टि लगाये बैठी कांग्रेस को 48 वर्षीय खानदानी शासन की काली कमाई के जरिए वाजपेयी सरकार की तरह ही मोदी सरकार को गिराने का बहाना मिल जाता।

देश की सीमाओं की चाक- चौबंद व्यवस्था करने से महंगाई बढ़ना और GDP कम होने की मोदीजी कतई चिंता नहीं करके, निरंतर देशहितैषी कार्यों में तल्लीन रहते हैं। नेहरू और मोदीजी में सबसे बड़ा अन्तर यही है कि नेहरू राष्ट्र सुरक्षा के लिए लापरवाह, मोदीजी बाह्य सुरक्षा में मामूली नहीं चूकते।

महंगाई बढ़ने के बाद घट सकती है, GDP गिरकर उठ सकती है, लेकिन देश की जमीन विदेशियों द्वारा हड़पने के बाद वापस लेने में लाले लग जाते हैं। दुर्योधन द्वारा 5 गांव तो क्या, चचेरे भाईयों को सूंई की नोक बराबर जमीन न देने से महाभारत हो गया, लेकिन राजीव के नाना (सोनिया के ससूर के ससूर) ने रंगीला चाचा बनकर देश की 2 लाख km² जमीन पाकिस्तान, चीन, म्यांमार को भेंट दी तो, इंदिरा ने देश का धन विदेशों में भेजने के लिए अधिकाधिक तेल आयात करवाने के लिए आबादी बढ़ाने के लिए घुसपैठ करवाई।

देखा यह नहीं जाता कि कितने कष्ट झेलने पड़े। काम पूरा होने से उठाए कष्ट भी अच्छी यादगार बन जाते हैं, तो बिगड़ने पर बूरी यादगार। लेकिन अधूरे काम जीवनपर्यन्त मन उचाटते रहते हैं। मोदीजी जो काम करने का निर्णय लेते हैं, खुद मोदीजी सहित जनता को भारी मुसीबत झेलनी पड़ती है, लेकिन देशहितैषी कार्य पूरा हो जाता है। मोदीजी ने कुछेक राज्यों में सत्ता गंवाना गवारा किया, सिद्धांतों से समझौता नहीं।

लोकतंत्र में सभी को मिल-जुलकर कार्यरत रहना पड़ता है। पूर्ववर्ती कुछ भ्रष्टाचारी अफसरों का फैला मकड़जाल तथा लूटेरे नेताओं को सुधारने में समय लगता है। कांग्रेसी और सेकुलरियों द्वारा दुष्प्रचार कि, उन्हीं के देशविरोधी कुकर्मों को मोदीजी क्यों सुधार रहे हैं, तो जनता ने सत्ता भी तो इसीलिए सौंपी थी। पूरानी लकीर पर ही चलना होता तो मोदीजी की क्या जरूरत?

सत्ता-सुख अर्जित करने योग्य कार्य कोई नहीं करना चाहता, भोगने के लिए अनेक तत्पर रहते हैं। सदैव सुख के साये में शांति-शांति जाप करके सोये रहने वाले, मौका मिलते ही सत्तारूढ़ होने की इंतजार में रहते हैं। मौके की नजाकत को भांप BJP में घुसे अन्य दलों के नेताओं में आधे अच्छे तो आधे भाजपा के लिए सरदर्द बन गए। ऐसों को एकदम से निकाला भी नहीं जा सकता, ना उनके कुकर्म मालूम थे।

युवाओं में दुष्प्रभाव किया गया है कि सामान बिक्री पर GST लागू है तो डाक्टर, वकील, agent तथा guide (मार्गदर्शक) इत्यादि द्वारा ली जाने वाली भारी-भरकम फीस पर क्यों नहीं? युवाओं को जानकारी होना जरूरी है कि GST अधिकतर फैक्ट्री उत्पादित सामान पर ही लागू है। कई सामान, विशेषकर किसानों द्वारा पैदावार अनेक खाद्यान्न पर कतई नहीं, तथा फीस के बदले आयकर रूप में 5% से 30% सभी चुकाते हैं।


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