Delhi Elections 2020: त्रिलोकपुरी में AAP ने बदला उम्मीदवार, बीजेपी से चुनौती

#DelhiElections2020: आम आदमी पार्टी की तरफ से रोहित कुमार महरौलिया चुनावी मैदान में

           

https://www.facebook.com/aajtak/posts/10159234921207580

1947 में आजादी मिलने पर 34 लाख किमी² क्षेत्रफल और 34 करोड़ आबादी का भारतवर्ष, विश्व आबादी में 2nd और क्षेत्रफल में 7वां था। दूसरे शब्दों में दुनिया के हिस्से की 17% आबादी तो जमीन 2.42% भारत में थी।

तिस पर तुर्रा यह कि एक वकील- धनाढ्य- नाना की जगह चाचा- Discovery of India पुस्तक लेखक- प्रकाड्य पंडित बनने के बावजूद जबरन प्रधानमंत्री बना (हीरा- मोती नामधारी का पुत्र), जवाहर लाल नेहरू, सर्वगुण- संपन्न बनने में रह गई एकमात्र शांतिदूत की कमी दूर करता हुआ, देश का दोहरा नुकसान करने के लिए, एक तरफ आबादी बढ़ाने के लिए धारा 370 लागू करने के साथ-साथ देश पर कर्जे की शुरुआत करके अमेरिका से सड़े-गले गेहूं मंगाए, तो दूसरी ओर गांधी के मूक समर्थन और गरीबों के भोलेपन से देश की जमीन घटाने के लिए, POK पाकिस्तान को, अक्साई चिन चीन को तथा कोको द्वीप तथा मणिपुर का काबू व्हेली रमणीय स्थल, जहां एक साल रहने से बिमारियां स्वत: समाप्त हो जाती हैं, बर्मा को भेंट करने का नतीजा हुआ कि आज भारत की जमीन 34 से 32 लाख किमी² रह गई, लेकिन आबादी 34 से 134 करोड़ हो गई।

भारत से 6 करोड़ घुसपैठिए निकलने पर 128 करोड़ आबादी और जमीन 32 लाख किमी² अनुसार 32÷ 128 = 100 व्यक्तियों के हिस्से 1/4 किमी² होने से हर नागरिक का 1 किमी² ÷400 =2500 मीटर जमीन पर अधिकार बनता है। इसी जमीन में प्राकृतिक संसाधन स्वरूप पर्वत, नदियाँ, जंगल, बर्फीले क्षेत्र तथा दलदली जमीन इत्यादि आधा हिस्सा होने से हर व्यक्ति का 1250 मीटर पर हक है। इसी प्रकार मानवजनित सुखों रेल, सड़क, खेत, विद्यालय, सैनिक छावनी, अस्पताल, कल-कारखाने और गली-मौहल्ले हेतु 1250 की बजाय 2% अनुसार 25 मीटर पर हर नागरिक का अधिकार हुआ। एक km² में एक लाख m² जमीन होती है। धनाढ्य को अधिक होने से गरीब हेतु 25 की बजाय 20 मीटर जमीन अति आवश्यक है। इसलिए जिसका एकमात्र मकान हो, उसका ताला तोड़ना तो दूर, खरीदना भी नहीं चाहिए।

मूलभूत सुविधा अनुसार किसी गरीब के एकमात्र छोटे से मकान को कांग्रेसी और सपाई गुंडे ताला तोड़कर हड़पें, इसका स्पष्ट अर्थ है कि भारत में रहना है तो, यातो किसी पापी का चाटूकार बनें या जिंदगी कोर्ट- कचहरी परिसर में बितायें। साफ जाहिर है कि देश अभी पुर्ण रूप से आजाद नहीं हुआ है। देश के 128 करोड़ नागरिकों को किसी न किसी रूप में मात्र 12800 अति सम्पन्न व्यक्तियों के सामने मजबूर होना ही पड़ता है। कोई एक रोटी कम खाकर स्वतंत्र रहना चाहे, उसे समाज के पापी कोई न कोई षड्यंत्र रचकर थाना- कोर्ट, भ्रष्ट नेता या रिश्वतखोरे अफसर के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर करते हैं।

बेहतर है वो दोजख, जहाँ सर झुकाना ना पड़े।
इसलिए मैंने हर तरह की परेशानी झेलना स्वीकार करने का निर्णय ले रखा है, परन्तु किसी घमंडी के सामने नहीं झुकना। उसीका नतीजा है कि, न तो मेरे पास साइकिल है, नाहि दवा के लिए पैसे। कैसी भी बिमारी हो, अपने हिसाब से इलाज कर लेता हूँ। दुखी मैं नहीं, डॉक्टर हैं। किसी अमीर के मन में मुझसे झगड़ा करने की हो, जेल होने पर मुझे आपत्ति नहीं! कोई बात करना चाहे, गरीब और पुराना परिचित चाहे जितनी देर करे, अमीर से 20 रूपये प्रति मिनट इसलिए, क्योंकि सेवानिवृत्त नहीं होने से वेतन 70 हजार ÷ 20 दिन = 3500 रूपये रोजाना मिलते थे। रविवार, पुर्ण अवकाश तथा वार्षिक 50 दिन EL, CL, Medical leave मिलने से सरकारी कर्मचारी महीने में 20 दिन काम करता है।


+