प्रधान आर्थिक सलाकार बोले- गांधी ने भगत सिंह को बचाने की नहीं की ज्यादा कोशिश

संजीव सान्याल ने कहा कि यह कहना बेहद कठिन है कि महात्मा गांधी भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों को फांसी से बचाने में कामयाब होते या नहीं?

           

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भारत पूरी दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जहां ऐसे लोग रहते हैं जो सेना के सामर्थ्य पर सवाल उठाते हैं ओर आतंकवादीयो को बचाने के लिए रात को कोर्ट खुलवा देते हैं और इसके पक्षकारों को जनता भारी बहुमत से सत्ता में लाती है,उनको न तो राष्ट्रवाद से कोई मतलब और न ही राष्ट्र से, यहा एक आदमी ,जो वर्षों से जमा गन्दगी को साफ करने के लिए रात-दिन मेहनत कर रहा है उस आदमी को कुछ तलवे चाटने वाले चाटुकार खुल्ले आम गाली देते हैं और एक मुहिम चलाकर उसके खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं।यहा राष्ट्र हित मे कोई काम करो तो संविधान खतरे में पड़ जाता हैं।


गाधी खुद का नाम करना चाहता था अहिसा तो उनका डौग था गाधी इधर उधर टाग नही अड़ाता तो शायद 1922 तक देश आजाद हो जाता क्या गाधी इरविन के समझौता समय उनको भगतसिंह के फासी का पता नहीं था ।भगतसिंह गाधी का बहुत सम्मान करते थे इन्के बहुत स्रोत है ।लेकिन मेरे सचे देशभक्त ने अपनी जान की परवाह न करते हुए फासी के फंदे पर लटक गहे अपनी 23 साल की उम्र में जान को देस के लिए लगा दी ।मै तो सवाल खड़ा करुगा गाधी पर तुम तो एक सचे देशभक्त भगतसिंह पर भी सवाल खड़े कर रहे हो इतिहास तो भगतसिंह का ।सता और स्वार्थ के लिए नेता गाधी का इतिहास पड रहे हैं ।गाधी ने चापलूसी एवं खुद को महानतम समझने के सिवाय कुछ नहीं किया ।जय भगतसिंह मेरी कलम हमेशा सचाई ही लिखेगी


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