स्वामी नारायण मंदिर के 'संत' बोले- पीरियड्स में खाना बनाया तो अगले जन्म में 'कुतिया' बनोगी

इसी मंदिर के हॉस्टल में पीरियड चेक करने के लिए लड़कियों की अंडरवियर उतरवा दी गई थी.

           

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मैं ज्यादा धर्म ग्रंथों की बात नहीं जानता।पर दक्षिण भारतीय होने के नाते इतना जानता हूं आज भी ज्यादा परिवार में स्त्रियां उन तीन दिनों में अलग बैठती है व उन्हें किचेन में व मंदिर जाने की इजाज़त नहीं होती।पर तार्किक रूप से देखा जाए तो इसके पीछे हमारे पूर्वज ने एक व्यवस्था स्थापित की ताकि इन दिनों उन्हें शारीरिक आराम मिल सके। पर कालांतर में रूढ़िवादियों ने इसे अलग ही रूप दिया कि उन्हें कोई न छुए ।आज भी केरल में शबरिमला में रजस्वला उम्र की स्त्रियों को प्रवेश वर्जित है जिसके लिए अब सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। स्त्री हमेशा पवित्र है और हम स्त्री रूप में समस्त देवियों का पूजन करते है।आज के परिवेश में कोई मंदिर नियम बना सकते है पर ये स्त्री पर छोड़ दिया जाए कि वे उसे किस रूप में माने।जहां तक गुजरात की घटना सामने आयी इस पर कड़ा एक्शन लेनी चाहिए ताकि स्त्रियों का अपमान कभी न हो। ये मेरा व्यक्तिगत विचार है हो सकता है आप सहमत न हो।


पता नहीं कौन से युग मे जी रहे ये लोग. हला की उस विशेष समय मे हाइजनिक पॉइंट ऑफ़ व्यू से शास्त्रों मे भोजन बनाना, रसोई मे जाना आदि निषेध रहता था, उसका रीजन भी होता है. उस काल मे शरीर से निगेटिव एनर्जी की अधिकता बड़ जाती है. और साइंस भी हाइजनिक पॉइंट का समर्थन करता आया. परन्तु उपरोक्त महाराज जी शायद मिडिल काल की किताबे पढ़े पड़े है जहाँ परिवर्तन का कोई गुंजाईश नहीं, जबकि परिवर्तन ही संसार का नियम, समय के अनुसार परिवर्तन लाजमी है और पूर्व की अपेक्षा अत्यधिक आधुनिक संसाधनों के उपलब्धता के कारण पूरी दुनियां मे हाइजनिक समस्या अब समस्या नहीं रही.

बढ़िया और शिक्षाप्रद विषय पोस्ट किया भईया


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