Delhi Violence: BJP सांसद गौतम गंभीर बोले- कपिल मिश्रा हो या कोई और, जो भड़काए वह नपे

#DelhiViolence मामले में गौतम गंभीर ने कपिल मिश्रा पर कार्रवाई करने की मांग की है

           

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गौतम गंभीर जी ज्यादा चमचागिरी मत करो

क्या गलत कहा कपिल मिश्रा ने

जिन हलाला की पैदावारो ने अपनी औरतो को सड़क पर बिठा दिया है आम नागरिक को तंग करने के लिए उनको सलाह ही तो दी है कि जो धन्धा करना है सड़क पर मत करो अपने घरो मे करो

मेरी सलाह

जली हुई बसो मे फैंक दो जिन्होंने बसे जलाई है उनको

जले हुए पैट्रोल पंप मे फैंक दो जिन्होंने पंप जलाया है उनको

बाबर ने जैसे कंधार लेजाकर हर चीज नीलाम की थी वैसे ही इन दंगाईयो की हर चीज नीलाम करो


दिल्ली में #CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के विरोध में पथराव, आगजनी और हिंसा में शहीद हुए पुलिस हेड कांस्टेबल रतन लाल जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और परिजनों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति दें!

CAA के विरोध के नाम पर देश की छवि खराब करने का यह कुत्सित प्रयास है। अमेरिका के राष्ट्रपति के आगमन के समय ही ऐसा उपद्रव अकस्मात नहीं हो सकता है, बल्कि यह सोची-समझी साजिश है। मैं राहुल गांधी और विपक्षी दल के नेताओं से यह पूछना चाहता हूं कि क्या आपके राजनीतिक हित, देशहित से बड़े हैं?


यह सीरिया नहीं है यह हिन्दुस्तान है और उसका दिल दिल्ली है। सारा कुछ प्रायोजित है और सारा कुछ देश की कीमतों पर हो रहा है। सनक इधर भी है सनक उधर भी है। दोनों तरफ़ सबकुछ है लेकिन अगर कुछ नहीं है तो वह है हिन्दुस्तान वह है हमारी संस्कृति हमारी सभ्यता और आदर्श जो आज सड़क पर है बिल्कुल नंगा बिल्कुल असहाय।

यह जो कुछ भी है लेकिन न तो यह हमारा आर्यावर्त है न ही हमारा भारतवर्ष ही है और न ही हमारा आज का हिन्दुस्तान है या तथाकथित इंडिया ही है। जो कुछ भी है इसमें हम नहीं हैं इसमें आप भी नहीं हो सकते हैं।

हिंदुस्तान की लड़ाई इन्हीं आक्रांताओं से है। हमारी लड़ाई भी इन्हीं से है और कोई कारण नहीं है कि इस लड़ाई में आप ऐसे किसी संस्थाओं विचारों और लोगों के साथ हों। हिन्दुस्तान का दिल दिल्ली से धड़कता है ठीक उसी तरह जिस तरह हमारा दिल हमसे धड़कता है। हिन्दुस्तान नहीं जल सकता है हम यूँ ही नहीं मर सकते हैं। कीमत तो दोनों की है। न हम सस्ते हैं और न ही यह देश ही इतना कमजोर है।

जवाबदेही अगर किसी की नहीं है तो जवाब मिलेगा तगड़ा जवाब मिलेगा। हम तैयार हैं आप भी तैयार हो लें क्योंकि सवाल आपका है सवाल इस देश का है।



मैं उस वक्त टीवी देख रहा था जब कबीर नगर में कपिल मिश्रा और उनके साथ बैठे नागरिकता समर्थकों पर पत्थरबाजी शुरु की गयी। पुलिस के आग्रह पर वो लोग यह कहते हुए वहां से जाने के लिए तैयार हो गये कि तीन दिन में रास्ता खुलवाइये वरना हम आपकी भी नहीं सुनेंगे। रास्ता बंद होने से गुस्साये लोगों को वहां से हटाने के लिए इतना कहना जरूरी था।

और इसके बाद वो लोग वहां से जाने लगे। सारे टीवी चैनल ट्रम्प को रिपोर्ट कर रहे थे सिर्फ एक चैनल था इंडिया न्यूज जो कबीर नगर से लाइव कर रहा था। कपिल मिश्रा और वहां मौजूद नागरिकता कानून समर्थकों पर आसपास के घरों से अचानक पत्थरबाजी शुरु हो गयी। उस वक्त वहां पर्याप्त पुलिस भी मौजूद नहीं थी। लोग इधर उधर भागने लगे। इंडिया न्यूज का रिपोर्टर भी इस पत्थरबाजी में घायल हुआ।

थोड़ी देर बाद नागरिकता समर्थक दोबारा से इकट्ठे हुए और जो पत्थर उन पर फेंके गये थे उसी को उठाकर उन्होंने फेंकना शुरु किया।

दिल्ली में दंगों की शुरुवात यहीं से हुई। अब बताइये किसको दोषी मानें? कपिल मिश्रा और उनके साथ मौजूद लोगों को जो वहां सड़क खुलवाने के लिए धरने पर बैठ गये थे? या फिर उनको जिन्होंने कपिल मिश्रा और उनके साथ आये हिन्दुओं को देखते ही पत्थर बरसाना शुरु कर दिया? कपिल मिश्रा तो तीन दिन की बात कहकर वहां से जा रहे थे फिर तीन मिनट के भीतर ही लोगों के घर में पत्थरों का स्टॉक कहां से आ गया जो उन्होंने आव देखा न ताव दंगाई हो गये?

जिन्हें मेरी बात पर भरोसा न हो वो इंडिया न्यूज से संपर्क करके वो सारी फुटेज हासिल कर लें। सरकार को भी चाहिए ये सारी फुटेज हासिल करके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।


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