जस्टिस दीपक गुप्ता बोले- लोकतंत्र में सरकार का विरोध 'राष्ट्र विरोध' नहीं

SC के जस्टिस ने विरोध को लोकतंत्र के लिए ज़रूरी बताया

           

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विरोध करने का कोई तरीका होता है, आपके प्रदर्शन से दूसरो को तकलीफ क्यो? और विरोध किस बात का। विरोध भी जायज और नाजायज होता है। किसानो का प्रदर्शन उचित मूल्य के लिये, किसी नौकरी का रिजल्ट दो साल से नही आया उसके लिये प्रदर्शन, भ्रष्टाचार के लिये प्रदर्शन, जायज प्रदर्शन में आता है। पर अब ये जो प्रदर्शन के नाम पर बंधक बनाने की कोशिस, हिंसा फैलाने का प्रयास, वो किसी रूप में प्रदर्शन नही हो सकता।। जो कानून भारत के किसी नागरिक पर लागू नही होता, जो कानून अभी बना नही उसके नियम तय नही, आप उनको आपस में जोड़कर सिर्फ अंदेशे के आधार पर हिंसा कर रहे हो। और स्वयं मान रहे हो हम लोग कन्फ्यूज है। तो ये सब राष्ट्र विरोध ही कहलायेगा।।


पुलिस वालों की मौत और कितने दूसरे जिंदगी मौत के बीच है ,कितने घर जले,तोड़फोड़ आगजनी हुई ।इन सभी का कारण वारिस पठान का वह 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है।शर्जील इस्लाम का देश को तोड़ने वाली बात,औवेसी बन्दुओ की 15 मिन्ट पुलिस हटाओ ,AAP के अमनुतुल्ला का हमने 3000 साल राज किया है ,मनीष शिशोदिया का बयान के पुलिस ने दंगो में बसों में आग लगाई जैसे भड़काऊ बयान जिम्मेदार है।इन सभी को तुरंत NSA के अंतर्गत गिरफ्तार कर देना चाहिए।।वरना कौन इन सभी हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी लेता है।भविष्य में इस न हो तो उन सभी को तुरंत गिरफ्तार करो।


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