हिंसा के बाद AAP विधायकों ने लगाए नारे- 'दिल्ली जल रही है एलजी सो रहे हैं'

#Delhi #Jaffrabad #Maujpur | दिल्ली हिंसा के बाद AAP विधायकों का अनिल बैजल के घर के बाहर धरना

           

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यह दिल्ली के भजनपूरा के रस्टोरेंट कारोबारी कमल शर्मा का ट्वीट है ...यदि आप इन कमल शर्मा जी के ट्विटर हैंडल का अध्ययन करेंगे तब आपको लगेगा कि यह बेहद सेकुलर व्यक्ति थे.. इन्हें शांति दूतों से कभी कोई परेशानी नहीं होती थी यह r.s.s. को दंगाई कहते थे ..बीजेपी वालों को नई-नई गालियों से नवाज़ते थे .... केजरीवाल के बहुत बड़े समर्थक थे

और कई बार उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा है कि केजरीवाल ने उनके लिए मुफ्त में बिजली कर दिया है मुफ्त पानी कर दिया है जिसकी वजह से उनका धंधा बहुत आगे बढ़ गया है और अब उन्होंने अपने रेस्टोरेंट के बगल में भी एक नया रेस्टोरेंट बना लिया है।

यानी कि कुल मिलाकर सेकुलरिज्म की धीमी जहर से कमल शर्मा जी इस तरह से ओतप्रोत हो गए थे कि उन्हें पता नहीं था धीरे-धीरे उन्हें किस तरफ धकेला जा रहा है।

जो गलतियां सियालकोट लाहौर और कराची में बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाने वाले हिंदुओं ने की और जो गलतियां कश्मीर घाटी में बड़े-बड़े हवेलिया बनाने वाले कश्मीरी पंडितों ने की और जो गलतियां केरल के कासरगोड में बड़े-बड़े बंगले बनाने वाले हिंदुओं ने की ठीक वही सेकुलरिज्म का अफीम कमल शर्मा जी को भी धीरे-धीरे एक ड्रग एडिक्ट की तरह जोंबी बनाता जा रहा था।

जोंबी एक ऐसा टर्म है जो उस व्यक्ति या उस जानवर के लिए प्रयोग किया जाता है जिसका दिमाग उसके वश में न होकर किसी और के वश में है। दरअसल प्रकृति में ऐसे बहुत से ऐसे बैक्टीरिया, फंगस या वायरस पाए जाते हैं जिनका जीवन चक्र दो या तीन जीवो में होकर पूरा होता है इसलिए वह अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए किसी भी जानवर में घुसकर उसके दिमाग पर कब्जा कर लेते हैं और वह जानवर या वह व्यक्ति उस बैक्टीरिया या फंगस या वायरस का गुलाम बन जाता है। वह बैक्टीरिया या फंगस जो चाहता है जोंबी बना जीव वही करता है

ऐसे ही जोंबी बने कमल शर्मा जी की आंखें कल खुली और कल उन्होंने जो ट्वीट किया वह आपके सामने है।

आप भी अपने अंतरात्मा में झांकिये और सोचिए कि कहीं आज के चंद फायदों के लिए आपके अंदर भी कोई जोम्बी कमल शर्मा तो नहीं पल रहा???


सेकुलर इसे जरूर पढ़ें।

दिल्ली के भजनपुरा में एक पढ़े लिखे समझदार सेकुलर व्यापारी हैं श्री कमल शर्मा। आम आर्मी पार्टी और केजरीवाल के कट्टर समर्थक। हमेशा बिजली,पानी,स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे बेसिक मुद्दों की बात करते थे। फ्री की बिजली, पानी आदि की सुविधाओं के लिए केजरीवाल का समर्थन भी करते थे। करना भी चाहिए मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति जो भी करे वो प्रसंशा का पात्र होना चाहिए। मगर श्री कमल शर्मा जैसे सेकुलर लोगो को जब मेरे जैसा कोई व्यक्ति समझाता है कि बिजली पानी के साथ आप के घर की,आपके आफिस दुकान की,आपकी खुद की,आपके बीबी बच्चों की सुरक्षा भी मूलभूत मुद्दा है तो ऐसे लोग हमें सेकुलरिज्म की दुहाई देते हुए साम्प्रदायिक,संघी,गुंडा,भक्त,भाजपाई,दंगाई जैसे दर्जनों विशेषणों से अलंकृत करके दुत्कार देते हैं।

चुनाव परिणाम केजरीवाल के पक्ष में आया जिनकी पार्टी शाहीन बाग के साथ खड़ी थी। लेकिन दिल्ली के कमल शर्माओं ने इसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली आदि की जीत बताई। मगर जो असल में जीता था वो शाहीनबाग गैंग, जीत के बाद उसके हौसले और बुलंद हुए और दिल्ली के अन्य इलाकों पर कब्जा,बमबाजी,हत्या,फायरिंग,आगजनी का असली खेल शुरू हुआ।
अब यह आग सेकुलरिज्म के पुरोधा श्री कमल शर्मा के घर तक पहुची। उन्मादी भीड़ उनके रेस्टोरेंट के सामने नारे लगाते हुए खड़ी थी। वो सफाई देने लगे कि हम तो केजरीवाल के समर्थक हैं, हम सेकुलर हैं,हम भाजपा विरोधी हैं,हम तुम्हारे साथ हैं कम से कम हमारा घर दुकान तो बक्श दो......

भीड़ से एक आवाज आई कि तुम सिर्फ एक --------- हो।। और उसके आगे की कहानी श्री कमल शर्मा के ट्विटर के स्क्रीनशॉट की दो लाइनों में है। आप ने कुछ नही बिगाड़ा था किसी का मगर आप का कमल और शर्मा होना ही काफी है इसके लिए।

कहीं आप के अंदर या आपके पास भी तो कोई कमल शर्मा नही पल रहा??
साभार : आशुतोष


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