जानें, कौन हैं मौलाना साद, कैसे बने 150 देशों में फैली तबलीगी जमात के प्रमुख

मौलाना साद तबलीगी जमात के मुखिया हैं

           

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सवाल यव है कि निज़ाम्मुद्दीन मरकज़ से लोग नहीं निकले तो क्यूं नहीं निकले?
तो क्या सरकार ने ऐलान नहीं किया था कि जो जहां है वहीं रहें तो फिर निज़ाम्मुद्दीन मरकज़ से लोगों के न निकलने पर ऐतराज़ क्यों है?
जब वैष्णो देवी और गुरद्वारे में फंसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं तो मरकज़ में फंसे हुए लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों?
मीडिया सरकार से ये क्यों नहीं पूछती कि लॉकडाउन में मज़दूर सड़कों पर निकले तो क्यूं निकले?
संघियों के दोगलेपन की हद है जहां मीडिया शब्दों का घिनोना खेल खेलते हुए कह रही है "वैष्णो देवी में श्रद्धालु 'फंसे' हुए हैं. गुरुद्वारे मे फंसे हुए हैं और मरकज़ में 'छिपे' हुए हैं.."
हद है आख़िर इस खेल को कहां तक समझाएं..???
अब तो इस तरह के सवाल उठाना इस तरह से बार बार ख़ुद को बेगुनाह और संघी मीडिया के दोगले रवय्ये को एक्सपोज़ करना ऐसा लगने लगा है जैसे भैंस के आगे बीन बजा रहे हों।AMN


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