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एक तरफ दुष्टता की हद पार करने वाली ममता बनर्जी Corona के कारण बेबस हुई तो, दूसरी ओर महबूबा अपना राग अलाप कर अब शांत है। भारत पाक से 7 गुणा शक्तिशाली, अर्थात भारतीय का एक रूपया खर्च होगा तो, पाकिस्तानी का 7.

अपनी सगी बहन रूबिया की तरह खुद का अपहरण करवा पाक पहुंच महबूबा वहां की प्रधानमंत्री बनना चाहती थी। VP Singh सरकार बनने पर मुफ्ती मोहम्मद सईद गृहमंत्री बनते ही 6 दिन बाद 08 Dec 1989 को षड्यंत्र रच, रूबिया का kidnap करवा, कई खूंखार आतंकी छुड़वाये, जब्कि फारूख अब्दुल्ला ने आतंकी छोड़ने के लिए स्पष्ट इंकार किया तो राज्य सरकार भंग करने की धमकी दी। अब ममता, महबूबा कितना भी प्रलाप करें, देशवासी जग चुके हैं। शुक्र मनायें कि घुसपेठियों को वापस भेजने के लिए बेहद शालीन व्यवस्था की जा रही है, वर्ना हालात ऐसे भी बनाए जा सकते हैं कि उन्हें रोका जाए, वो दूम दबाकर भागने के लिए भी तरसें।

देशवासियो, और कितना अच्छा मौका चाहिए, घुसपैठिये निकालने का। अब बहुत अच्छा मौका है। वर्ना दिनों-दिन इनकी आबादी बढ़ती जायेगी, जिससे ये हावी होते चले जायेंगे, बाद में बहुत मुश्किल होगी। इसलिए अब इनको देश से निकालो, अन्यथा ये Corona कहर फैलायेंगे।

राजस्थान नागरिको,
2019 में मनमोहन सिंह की बजाय मुझे राज्यसभा भेजते तो, संभवतः मोदीजी मुझे घुसपेठिया-मुक्त भारत बनाने का कार्य प्रदान करने का अवसर देने से, चुंकि मैं पुर्वोतर भारत में 11 वर्ष सेवारत रहने से घुसपैठियों के अवैध डेरे उखाड़ने की कला जानता हूं, इसलिए प्रति सप्ताह 1 घुसपैठिया इस तरह पकड़ता, जिसके जरिए आप अन्य 100 पकड़कर पहले राजस्थान, तदुपरांत समस्त भारत को घुसपेठिया मुक्त कर सकते, जिसका श्रेय राजस्थान को होता।

कब निकालोगे.....
जिस्म में बैक्टीरिया जैसे भर जायेंगे, क्या तब निकालोगे? देर ना हो जाये, कहीं देर ना हो जाये।
निकालो इनको रे, कि कहीं और ना भर जायें।
देर ना हो जाये, कहीं ......
कहाँ हैं ये रोहिंग्ये, यही सब पूछते हैं।
कितने भारत भूमि में भर चुके, सब यही पूछते हैं।
देर ना हो जाये, ....

हर काम का वक्त मुकर्रर होता है।
हर अन्याय का फैसला कभी तो होता है।
वक्त निकलने पर सिर्फ पछतावा बचता है।
कीमती सही वक्त कहीं हाथ से ना निकल जाए,
देर ना हो जाये ... निकालो इनको रे, कि कहीं ....

निकालने पर रूकावट डाली कभी कांग्रेसियों,
कभी देशविरोधी सेकुलरियों ने,
बसाया इनको वोटबैंक लोभी गद्दार नेताओं ने,
भारत-माता से सहन नहीं होता अब बंगाल के
निवासियों पर ढ़ाये जो जुल्म इनके आकाओं ने।
निकालोगे तो विश्व एकटक देखेगा, क्योंकि
भारतीय युवाओं के रोजगार छिने इन्होंने।
इनके गिड़गिड़ाने से मन नहीं पसीजने पाए,
निकालो इनको रे, कि कहीं और देर ना हो जाये ..

ऐतबार करके भर लिया इन्हें,
अब जान के दुश्मन ये बन बैठे।
मौका है निकालने का निकाल दो इन्हें,
चाहे इनके मददगार मानें चाहे रूठें,
जान पर बनी है, बंगाल के नागरिकों पर
लोहा गर्म है, निकालो इनको हथौड़ा मारकर।
देर करना भारतीयों की आदत बन गई थी,
लेकिन अब और देर ना सही जाए।
देर ना हो जाये .....

निकालो इनको रे, कि कहीं और ना भर जायें।
देर ना हो जाये ... निकालो इनको रे, कि कहीं .....


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